DRS की Full Form फायदे और नुकसान हिंदी में जाने

DRS की Full Form फायदे और नुकसान हिंदी में जाने

 

नमस्कार दोस्तों इस लेख में आप डीआरएस फुल फॉर्म इन हिंदी के बारे में जानेंगे। दोस्तों क्रिकेट प्रेमी Drs शब्द से अंजान नहीं है क्यूँकि यह क्रिकेट की दुनिया में प्रयुक्त होने वाला Common शब्द है। इससे खेल की गुणवत्ता में भी सुधार होता है और खिलाड़ियों का भरोसा भी बढ़ता है। Drs का प्रयोग टीमें गेंदबाजी और बल्लेबाजी के दौरान दोनों समय कर सकती है और इस नियम को पहले 2 बार प्रयुक्त किया जाता था लेकिन कोरोना के चलते इसे 3 बार कर दिया गया है। 

इसके अलावा क्रिकेट के अलग अलग फॉर्मेट Drs का प्रयोग करने की सीमाएँ है जैसे वनडे और टी - 20 में एक पारी के दौरान एक ही बार रिव्यु ले सकते है जबकि टेस्ट में एक पारी 2 बार रिव्यु ले सकते है। क्रिकेट के खेल की इस शानदार तकनीक के बारे में अधिक जानने के लिए यह लेख डीआरएस फुल फॉर्म इन हिंदी को अच्छी तरह से पढ़ें। 

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डीआरएस फुल फॉर्म ( DRS का पूरा नाम )

डीआरएस फुल फॉर्म इन हिंदी में डिसीजन रिव्यु सिस्टम है इसके अलावा कई बार यू डिसीजन रिव्यु सिस्टम ( Umpire Decision Review System )  है क्यूँकि Drs में अंपायर भी शामिल  होते है। 


डीआरएस क्या है 

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DRS की Full Form फायदे और नुकसान हिंदी में जाने 


वह प्रक्रिया जिसके अंतर्गत खिलाडी अंपायर द्वारा दिए हुए निर्णय से संतुष्ट नहीं होता है और डीआरएस के निर्धारित समय पर " T " का निशान बनाकर उस निर्णय को तीसरे अंपायर द्वारा चेक करने की मांग रखता है इस प्रक्रिया को डीआरएस के नाम से जाना जाता है। बल्लेबाजी के दौरान अगर बल्लेबाज अंपायर के निर्णय से संतुष्ट नहीं है तो वे डीआरएस की मांग कर सकता है जबकि गेंदबाजी के दौरान सिर्फ कप्तान ही डीआरएस ले सकता है। 

खिलाडी द्वारा डीआरएस लेने के बाद तीसरे अंपायर द्धारा कई तकनीकी चीजों की सहायता से देखा जाता है और अगर वहीं नतीजाा आता है जो ऑन फिल्ड अंपायर ने दिया था तो फैसले में कोई बदलाव नहीं होता है जबकि अगर ऐसा नहीं होता तो तीसरे अंपायर द्वारा दिया निर्णय मान्य होता है। इस प्रकार डीआरएस का प्रयोग क्रिकेट खेल में होता है। 


डीआरएस का प्रयोग  

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ( International Cricket Council) द्धारा क्रिकेट के अलग अलग फॉर्मेट के अनुसार इसके प्रयोग करने की भी सीमाएँ रखी हुई है। किसी भी टीम को टेस्ट मैच में एक पारी में 2 बार , वनडे और टी 20 में पारी में एक बार डीआरएस लेने की अनुमति होती है। इसी प्रकार अगर डीआरएस का फैसला टीम के हक में रहता है तो वे डीआरएस उसके लिए आगे भी बरकार रहता है और अगर डीआरएस का फैसला टीम के विरुद्ध हो जाता है तो डीआरएस को समाप्त कर दिया जाता है। 


डीआरएस में प्रयुक्त होने वाली तकनीक 

सामन्यतः डीआरएस में 3 तकनीक का  उपयोग होता है इन्हीं की सहायता से अंपायर अपना डिसीजन लेता है और इसी के माध्यम से अंपायर हर तरिके से पहले अच्छी तरह से जान पाता है और फिर अपना फैसला सुनाता है। 

स्नीको मीटर  :- अगर कोई बल्लेबाज के बल्ले से गेंद छुयी है या नहीं इसे जानने के लिए थर्ड अंपायर स्नीको मीटर का उपयोग करता है। जैसे अगर गेंद सीधी जा रही होती है तो लाइन एक दम सही होती है और अगर गेंद किसी भी चीज को छूती है तो तरंगे नजर आती है और इससे अंपायर को पता चल जाता है की गेंद बल्ले से टकराई है या नहीं। कई बार गेंद बल्लेबाज के किसी और भाग को छूती है लेकिन जमीनी अंपायर उसे आउट करार दे देते है लेकिन स्नीको मीटर इसे क्लियर करता है और सही फैसला सुनाता है। 

हॉट स्पॉट :- जब अंपायर यह पता करना चाहता है की गेंद Ped और बैट में से कहा पर लगी है तब वे हॉट स्पॉट का उपयोग करता है इसमें जहाँ पर भी गेंद लगी होती है उसे सफेद कलर से दर्शाया जाता है जबकि बाकि सारी जगह कालापन  होता है। इसके अंतर्गत इंफ्रा-रेड इमेजिंग तकनीक की सहायता ली जाती है। इससे अंपायर को आसानी से पता चल जाता है की गेंद बल्ले को छूकर गयी है या नहीं। 

हॉक-आई तकनीक :- जब बल्लेबाज एलबीडबल्यू आउट होता है तो अगर वे इस फैसले पर डीआरएस लेता है। इस तकनीक के माध्यम से अंपायर यह देखता है की गेंद की पिचिंग कहा पर हुई है और गेंद विकटो से टकराई है या नही आदि जिससे वे बल्लेबाज को आउट या नॉट आउट दे सकें। हॉक आई एलबीडबल्यू में प्रयुक्त होने वाली तकनीक है इससे बल्लेबाज द्वारा  एलबीडबल्यू आउट होने पर उतपन होने वाले संशय को दूर किया जाता है। 

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सबसे पहले डीआरएस प्रयोग हुआ 

भारत और श्रीलंका बीच 2008 में हुए मुकाबले में सबसे पहले डीआरएस का उपयोग हुआ था यह एक ट्रायल था और इसके सफल होने के पश्चात ICC ने 2009 में इसे पूरी तरह लागू कर दिया और अब हर सीरीज में इसका उपयोग किया जाने लगा। हालाँकि वनडे क्रिकेट में डीआरएस का प्रयोग 2011 शुरू हुआ। 


T - 20 में सबसे पहले डीआरएस का प्रयोग हुआ 

जब डीआरएस वनडे और टेस्ट में सफल होने लगा तो इसे क्रिकेट के तीसरे फॉर्मेट T 20 में भी लागू करने का फैसला लिया गया और 2017 से अंतरास्ट्रीय T 20 मुकाबलों में डीआरएस का इस्तेमाल होने लगा इसके साथ ही अल्ट्रा एज और बॉल ट्रैकिंग भी जैसी तकनीक भी शुरू हुई। 


डीआरएस के नियम 

ICC द्धारा डीआरएस के कुछ नियम बताए गए है जिसकी पालना करते हुई खिलाडी मैदान पर इस तकनीक का फायदा उठा सकता है। 


  • जब कोई टीम फील्डिंग कर रही है और उसे डीआरएस लेना है तो  टीम के कप्तान को अंपायर की " T " का इशारा करना होगा इसके अलावा अन्य टीम के खिलाडी फील्डिंग के समय डीआरएस का इस्तेमाल नहीं कर सकते है। 
  • बल्लेबाजी करते समय डीआरएस लेने का निर्णय बल्लेबाज के हाथ में होता है अगर उसे अंपायर के फैसले पर भरोसा नहीं है तो वे " T " का इशारा करके रिव्यु ले सकते है। 
  • ICC द्धारा फॉर्मेट के अनुसार रिव्यू का इस्तमाल ही टीमें कर सकती है और अगर रिव्यु का फैसला उनके हक में जाता है तो वे आगे भी रिव्यू ले सकते है। 


डीआरएस के फायदे 

  • वर्तमान में हम कई बार देखते है की अंपायर जो भी फैसला देते है डीआरएस उसे रिवर्स कर देता है इस प्रकार यह हर खिलाडी के लिए फायदेमंद है। 
  • कई अहम मौके पर डीआरएस द्वारा मैच का पासा पलट जाता है 

 

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डीआरएस के नुकसान 

  • डीआरएस के आने के बाद खिलाड़ियों का अंपायर से भरोसा उठ गया है और इससे उनके निर्णय लेने के फैसले के सम्मान में भी कमी आयी है। 
  • इस तकनीक को सेटअप करने के लिए काफी पैसे खर्च होते है इसलिए इसे काफी महँगी तकनीक मानी जाती है। 
  • इस तकनीक के आने के पश्चात अंपायर के निर्णय कई बार  बदलने पड़ते है इससे टीमों को भी कई करीबी मैच में हार झेलनी पड़ती है। 


अंपायर कॉल क्या है 

अगर तीसरा अंपायर यह साफ नहीं कर पाता की बल्लेबाज आउट है या नॉट आउट तो इस स्तिथि में ऑन फिल्ड अंपायर ने जो निर्णय दिया उसे सही माना जाता है। इससे उस टीम का रिव्यू भी बचता है और तकनीक से ज्यादा अंपायर के फैसले को माना जाता है। अंपायर कॉल के कई फायदे भी है तो कई नुकसान भी है। 


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निष्कर्ष 

उम्मीद करता हूँ दोस्तों की आपको यह लेख डीआरएस फुल फॉर्म इन हिंदी पसंद आया होगा और आपको डीआरएस के बारे में काफी जानकारी मिली होगी। डीआरएस के बारे में आपने सुना जरूर होगा लेकिन आज आपको इसके बारे जानकारी मिली होगी। अगर आपके मन इससे जुड़े  कोई भी सवाल या डॉउट है तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है आपको जल्द से जल्द Reply मिलेगा। 

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